Wednesday, June 13, 2007

aakash ke baadal bol uthe...

आकाश से बादल बोल उठे
तुम भी तो अब कुछ बोलो ना
झूम उठा है मेरा मन
तुम भी इस रंग में हो लो ना

धरती ने जब थी आह भरी
आकाश ने प्यार दिखाया है
वर्षा है अब हर आंगन में
तुम भी अब मुझे डुबो लो ना

है हवा में भी कुछ शरारत सी
पत्ता पत्ता सहलाया है
मुस्का के तुम सौंधी मिटटी सी
मुझ को भी अब बहका दो ना

आकाश से बादल बोल उठे
तुम भी तो अब कुछ बोलो ना...

Rain is here
and i feel
drenched in your love already
this scent of wet sand
is definitely you somewhere...